May 13, 2026

कोटवारी भूमि पर कब्जा होने से संकट में आया गरीब परिवार,कलेक्टर से लगाई गुहार

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Samna.in.Raigarh कोटवारी भूमि पर कब्जा होने से संकट में आए प्रभावित परिवार के उचित पुनर्वास, मुआवज़ा और जीवनयापन की व्यवस्था करने के साथ ही कोटवारी भूमि की हुई अवैध बिक्री, हस्तांतरण एवं कब्ज़े की निष्पक्ष जांच कराने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से गुहार लगाई है।

जीविकोपार्जन का एकमात्र सहारा है कोटवारी भूमि

वार्ड क्रमांक 10 तहसील घरघोड़ा, जिला रायगढ़ के रमेश दास महंत का कहना है कि उनके पूर्वजों द्वारा वर्षों तक ग्राम कोटवार के रूप में शासन एवं ग्राम प्रशासन की सेवा की जाती रही तथा उसी सेवा के बदले मालगुजारों द्वारा प्रदत्त कोटवारी भूमि खसरा नंबर 530 पर हमारा परिवार पीढ़ियों से काबिज एवं काश्तकार रहा है।वर्षों से उनका परिवार इसी भूमि पर खेती-किरानी करके अपना भरण-पोषण करता आया है। इसी भूमि से प्राप्त आय से परिवार का भोजन, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, दवा इलाज एवं दैनिक जीवन चलता रहा है

STP प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण की तैयारी

वर्तमान में उनकी इस भूमि को एसटीपी प्रोजेक्ट के लिए लेने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे उनका पारेवार अत्यंत भय, चिंता एवं असुरक्षा की स्थिति में जीवनयापन कर रहा है। क्योंकि शारान द्वारा बिना किसी पुनर्वास, मुआवज़ा या वैकल्पिक व्यवस्था के इस भूमि को अधिग्रहित कर लेने से उनके परिवार पर गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। बैंक द्वारा लिए गए ऋण की किश्तों के लिए लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं तथा बैंक कर्मचारी घर आकर भी ऋण जमा करने का दबाव बना रहे हैं।

आर्थिक संकट का डर

ऐसी स्थिति में यदि उनके परिवार की भूमि भी समाप्त हो जाती है, तो रोजगार एवं जीवनयापन का अंतिम संहारा भी खत्म हो जाएगा और उनका परिवार अत्यंत गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक संकट में फँस जाएगा। इसलिए उन्होंने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से इस मामले में जांच कर राहत प्रदान करने की अपील की है।

कोटवारी भूमि पर कब्जा करने की तैयारी!

पूर्व में कुछ भूमि दलालों एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से विक्रय/हस्तांतरण किया गया है, एवं वर्तमान में भी कुछ व्यक्तियों द्वारा निजी स्वार्थवश एवं अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करने की मंशा से कोटवारी भूमि को कब्ज़ा कर विक्रय/हस्तांतरण किए जाने का अन्यायपूर्ण प्रयास किया जा रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच एवं कार्यवाही नहीं की गई, तो शेष बची भूमि भी पूर्णतः समाप्त हो सकती है, जिससे हमारा परिवार पूरी तरह भूमिहीन एवं असहाय हो जाएगा।

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