रसोई गैस की किल्लत होगी दूर,भारत अब अमेरिका से दोगुना आयात करेगा LPG
samna.in LPG Update भारत अब ऊर्जा सुरक्षा के मामले में खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। भारत अमेरिका से सालाना 22 लाख टन एलपीजी खरीदता है, जिसे अब बढ़ाकर दोगुना किया जा सकता है।
भविष्य में LPG संकट से बचने की तैयारी
इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य LPG के लिए खाड़ी देशों पर भारत की निर्भरता को रूप से कम करना और भविष्य के किसी भी संकट से निपटने के लिए सुरक्षित बैकअप तैयार करना है। इससे पहले भारत अपने तेल आयात के स्रोतों में भी विविधता ला रहा है। भारत खाड़ी देशों से इतर, रूस, वेनेजुएला और अब ईरान से भी कच्चे तेल का आयात कर रहा है।
अमेरिका से मिली LPG की निर्बाध सप्लाई
इससे पहले पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के दौरान खाड़ी देशों से आने वाले LPG जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गए थे। इस बीच अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा मददगार बनकर उभरा। केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी भारतीय बाजार में कई गुना बढ़ी है। तेल कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “युद्ध के दौरान हमें कच्चे तेल की उपलब्धता का तो भरोसा था, लेकिन एलपीजी को लेकर बड़ी चिंता थी क्योंकि खाड़ी देशों के अलावा दुनिया में बहुत कम देश इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं। ऐसे संकट में अमेरिका से मिली निर्बाध सप्लाई ने देश में किल्लत नहीं होने दी।”
2025 में भारत अपनी कुल जरूरत का 8 फीसदी से भी कम एलपीजी अमेरिका से खरीदता था। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच हुए सालाना कॉन्ट्रैक्ट लागू होने के बाद जनवरी 2026 में यह हिस्सेदारी बढ़कर 12 फीसदी हो गई। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी में युद्ध छिड़ने और खाड़ी देशों से सप्लाई रुकने के बाद अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी छलांग लगाकर 37 फीसदी पर पहुंच गई। वर्तमान में यह हिस्सेदारी रिकॉर्ड 65 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है।
भारत को नए देशों से LPG के रास्तों की तलाश
LPG को लेकर भारत सिर्फ अमेरिका पर भी पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। पोर्टफोलियो को और अधिक डाइवर्सिफाई करने के लिए भारतीय तेल कंपनियां अब खाड़ी देशों से इतर अल्जीरिया, अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी एलपीजी की कूटनीतिक खरीद के रास्ते तलाश रही हैं।
इससे पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने मई 2026 में ही सभी तेल कंपनियों को भविष्य की किसी भी खराब स्थिति से निपटने के लिए 30 दिनों का एलपीजी रिजर्व बनाने का एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया था। यह 30 दिनों का रणनीतिक रिजर्व, तेल कंपनियों द्वारा घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों की मांग को पूरा करने के लिए पहले से बनाए रखने वाले 45 दिनों के स्टॉक के अतिरिक्त होगा।



