October 1, 2026

अगर आपको भी आए महात्मा गांधी का कॉल,तो भूल कर भी ना करें रिसीव

n72863811917907389354834e2df8c5e408caac1f8331b8c5794cb60850c24b0b447cf56dc14bc4056505db
Share

Samna.in.गांधी जयंती से ठीक पहले देश भर के हजारों मोबाइल यूजर्स की स्क्रीन पर एक नाम फ्लैश हो रहा है वो है महात्मा गांधी,अगर आपके स्मार्टफोन की घंटी बजे और स्क्रीन पर कॉलर का नाम महात्‍मा गांधी’ दिखाई दे, तो जरा सावधान हो जाइये.

ज्यादातर लोग इसे कोई मजाक या तकनीकी गड़बड़ी समझकर कॉल रिसीव कर रहे हैं, लेकिन यहीं वे सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं.यह कोई प्रैंक नहीं, बल्कि शातिर साइबर ठगों द्वारा बिछाया गया एक नया जाल है. इसका मकसद लोगों की जिज्ञासा का फायदा उठाकर उनके बैंक खाते में सेंध लगाना है.

कॉलर की पहचान करने वाले ट्रूकॉलर (Truecaller) जैसे ऐप कॉलर की पहचान की पुष्टि नहीं करते, बल्कि वे कम्युनिटी डेटाबेस और यूजर्स द्वारा सुझाए गए नामों के आधार पर काम करते हैं. साइबर ठग इसी लूपहोल का फायदा उठाते हैं. वे किसी अनजान सिम कार्ड के नाम को जानबूझकर महात्‍मा गांधी, किसी बड़े वीआईपी, पुलिस एजेंसी या सरकारी विभाग के नाम से रजिस्टर कर देते हैं. जब आपके पास कॉल आती है, तो कॉलर आईडी पर वही नाम दिखाई देता है.

जिज्ञासा के कारण लोग उठा रहे कॉल

आमतौर पर लोग किसी अनजान नंबर की कॉल को नजरअंदाज या रिजेक्ट कर देते हैं, लेकिन जब स्क्रीन पर महात्मा गांधी जैसा ऐतिहासिक और चौंकाने वाला नाम दिखता है तो बहुत से लोग जिज्ञाशावश कॉल उठा लेते हैं. साइबर सुरक्षा की भाषा में इसे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ कहा जाता है, जहां हैकर्स किसी सिस्टम को हैक करने के बजाय इंसान की भावनाओं और उत्सुकता को अपना शिकार बनाते हैं. एक बार जब आप फोन उठा लेते हैं, तो ठगों का पहला और सबसे अहम मकसद पूरा हो जाता है

कॉल उठाते ही ऐसे बिछाया जाता है जाल

फोन रिसीव होते ही दूसरी तरफ बैठा फ्रॉडस्टर अचानक बेहद गंभीर और आधिकारिक लहजे में बात शुरू करता है. वह खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स या टेलीकॉम विभाग का कोई बड़ा अफसर बताता है. इसके बाद वह कोई डर दिखाता है या कोई जरूरी काम तुरंत करने का सुझाव देता है. जैसे आपके बैंक खाते का तुरंत री-वेरिफिकेशन जरूरी है, आपका सिम कार्ड या बैंक खाता तुरंत ब्लॉक होने वाला है, आपके नाम पर कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है या आपने कोई बड़ी लॉटरी जीत ली है. वॉइस कॉल के जरिए की जाने वाली इस ठगी को ‘विशिंग’ (Voice Phishing) कहा जाता है. डरा-धमकाकर या लालच देकर व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता खत्म कर दी जाती है.

एक चूक और बैंक खाता साफ

कॉल पर भरोसा जमाने के बाद जालसाज आपसे संवेदनशील जानकारियां उगलवाने की कोशिश करते हैं. वे आपसे ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN), पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल्स या पहचान संबंधी दस्तावेज मांगते हैं. कई मामलों में तो वे वेरिफिकेशन या पार्सल ट्रेस करने के बहाने एसएमएस या व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजते हैं या फिर कोई स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं. जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करते हैं या अपनी गोपनीय जानकारी साझा करते हैं, आपके बैंक खाते से चंद मिनटों में सारे पैसे गायब हो जाते हैं.

इस तरह के फ्रॉड से बचने का सबसे पहला नियम है कि केवल कॉलर आईडी के नाम पर कभी भरोसा न करें. अगर किसी अनजान नंबर से कोई भी संदिग्ध या चौंकाने वाली कॉल आए, तो उसे तुरंत काट दें. कॉलर के कहने पर कभी भी जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. यदि कॉलर किसी बैंक या विभाग का नाम ले रहा है, तो भी उसकी किसी बात में न आएं. किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, कार्ड डिटेल या कोई आईडी बिल्कुल शेयर न करें.

अनजान आदमी द्वारा भेजे किसी लिंक पर क्लिक न करें.अगर आपके फोन पर ऐसा कोई नंबर आए, तो उसे तुरंत अपने फोन और कॉलर आईडी ऐप में ‘Block’ और ‘Report Spam’ करें, ताकि दूसरे लोग भी इस ठगी का शिकार होने से बच सकें.