July 22, 2026

रायगढ़ की मोबाइल मेडिकल यूनिट व्यवस्था पर गंभीर सवाल, दवाओं का अभाव,जांच सेवाएं प्रभावित

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खराब उपकरणों के बीच दम तोड़ रही मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना

Samna.in.Raigarh छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य शहरी गरीब एवं स्लम बस्तियों तक निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। लेकिन रायगढ़ जिले में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की वर्तमान स्थिति इस उद्देश्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। जिले में कई मोबाइल मेडिकल यूनिटों में आवश्यक चिकित्सा उपकरण खराब पड़े हैं, दवाइयों और जांच सामग्री की कमी बनी हुई है तथा कई बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हैं। इन परिस्थितियों का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

दवाइयों और जांच सेवाओं की स्थिति चिंताजनक

जानकारी के अनुसार, मोबाइल मेडिकल यूनिट में उपलब्ध कराई जाने वाली लगभग 170 प्रकार की आवश्यक दवाइयों में से वर्तमान में केवल सीमित दवाइयां ही उपलब्ध हैं। कई मरीजों को आवश्यक दवाएं नहीं मिलने के कारण बाहर से दवाइयां खरीदने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी प्रकार, योजना के तहत उपलब्ध 41 प्रकार की पैथोलॉजी जांचों में से केवल कुछ ही जांचें नियमित रूप से हो पा रही हैं। कई आवश्यक जांचें उपकरणों की खराबी, रिएजेंट एवं अन्य सामग्री की कमी के कारण प्रभावित हैं। वहीं विशेष (स्पेशल) जांचों की रिपोर्ट भी कई दिनों की देरी से प्राप्त होने की शिकायत सामने आ रही है। समय पर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने से चिकित्सकों को उपचार शुरू करने में कठिनाई होती है और मरीजों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में आई इस गिरावट का असर अब मरीजों की संख्या पर भी दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले की तुलना में मोबाइल मेडिकल यूनिटों में मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है।

वाहन बने गर्मी के डिब्बे

मोबाइल मेडिकल यूनिट के वाहनों को मरीजों की सुविधा के लिए वातानुकूलित (एयर कंडीशंड) बनाया गया है, लेकिन कई वाहनों में एयर कंडीशनर का समुचित उपयोग नहीं होने से वाहन के अंदर अत्यधिक गर्मी बनी रहती है। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें रायपुर स्थित हेड ऑफिस से AC का सीमित उपयोग करने के मौखिक निर्देश दिए जाते हैं। यदि ऐसा है, तो यह न केवल कर्मचारियों बल्कि मरीजों, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए भी असुविधाजनक स्थिति पैदा करता है।

सफाई व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

मोबाइल मेडिकल यूनिटों में स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। निरीक्षण के दौरान कई वाहनों में धूल और गंदगी दिखाई दी। कई यूनिटों में लगे पर्दे लंबे समय से धुले नहीं प्रतीत हुए, जबकि मरीजों के उपयोग में आने वाली चादरें भी गंदी अवस्था में मिलीं। स्वास्थ्य सेवाओं में स्वच्छता एक महत्वपूर्ण मानक है, ऐसे में इस प्रकार की स्थिति संक्रमण के खतरे को भी बढ़ा सकती है।

कैंप के दौरान ड्यूटी स्टाफ के अनुपस्थित रहने की शिकायत

सूत्रों के अनुसार, कई स्थानों पर आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान निर्धारित कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते, जिससे मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावी निगरानी के अभाव में ऐसी स्थिति बार-बार देखने को मिल रही है। यदि समय पर मॉनिटरिंग की जाए तो इस प्रकार की अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

प्रबंधन पर कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप

योजना का संचालन कर रही बव्या हेल्थ सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन पर भी कर्मचारियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि दवाइयों, उपकरणों, जांच सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी की जानकारी समय-समय पर उच्च अधिकारियों को दी जाती है, लेकिन समस्याओं का समाधान अपेक्षित गति से नहीं हो पाता।

कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि निरीक्षण एवं ऑडिट के दौरान अधिकांशतः केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर मौजूद वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों के साथ-साथ मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

योजना के उद्देश्य पर पड़ रहा असर

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना का मूल उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। लेकिन यदि दवाइयों की कमी, उपकरणों की खराबी, जांच सेवाओं में व्यवधान, स्वच्छता की कमी और प्रभावी मॉनिटरिंग जैसी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधित विभाग और कंपनी प्रबंधन को तत्काल स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, ताकि आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।