March 23, 2026

रक्षाबंधन 30 अगस्त या 31 अगस्त… तिथि को लेकर संशय.. राखी पर है भद्रा का साया…जानिए क्या है शुभ मुहूर्त…

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सामना:- रक्षाबंधन पर्व की तिथि को लेकर लोगों में इस बार बहुत संशय है,लोग संशय में हैं कि रक्षाबंधन 30 अगस्त को मनाएं या 31 अगस्त को। आपको बता दें कि रक्षाबंधन इस दिन 30 और 31 अगस्त दोनों दिन मनेगा लेकिन भद्रा के साए की वजह से आपको शुभ मुहूर्त का खास ख्याल रखना होगा।30 अगस्त को लगभग पूरे दिन ही भद्रा का साया रहेगा और 31 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सिर्फ सुबह कुछ देर तक ही है।हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है इस दिन बहनें अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं।इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 30 अगस्त और 31 अगस्त दोनों दिन मनाया जाएगा. साथ ही रक्षाबंधन पर पूर्णिमा का संयोग भी बनने जा रहा है जो कि बेहद खास माना जाता है।आइए जानते हैं रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और शुभ संयोग।

क्या है शुभ मुहूर्त:- शास्त्रों के मुताबिक, रक्षाबंधन भद्रा काल में नहीं मनानी चाहिए, ऐसा करना बेहद अशुभ माना जाता है।रक्षाबंधन पर भद्रा का साया 30 अगस्त को रात 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा, इसके बाद से राखी बांधना उपयुक्त रहेगा वहीं 31 अगस्त को सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक राखी बांधी जा सकती है कुछ पंडितों का मानना है कि रात के समय राखी बांधना शुभ नहीं होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को  श्रावण पूर्णिमा की तिथि 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगी और इस दौरान भद्रा का साया नहीं रहेगा। इस कारण 31 अगस्त को सुबह-सुबह राखी बांधना शुभ होगा। 

31 अगस्त के शुभ मुहूर्त :राखी बांधने का शुभ महुर्त इस दिन सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक का है। इसके बाद पूर्णिमा का लोप हो जाएगा।अमृत मुहूर्त सुबह 05:42 से 07:23 बजे तक।इस दिन सुबह सुकर्मा योग रहेगा।

इन मुहूर्त में भी बांधी जा सकती है राखी- अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:14 से 01:04 तक।अमृत काल : सुबह 11:27 से 12:51 तक।विजय मुहूर्त : दोपहर 02:44 से 03:34 तक।सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:54 से रात्रि 08:03 तक।

क्या करें और क्या न करें
– रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रारहित काल में ही मनाएं।
– रक्षाबंधन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
– स्नान के बाद सूर्यदेव को जल देते हुए अपने कुल देवी और देवताओं का स्मरण करें और आशीर्वाद लें।
– इसके बाद शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए राखी की थाली को सजाएं।
– राखी की थाली में तांबे या पीतल की थाली में राखी, अक्षत, सिंदूर,मिठाई और रोली जरूर रखें।
– अपने कुलदेवता को रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र को समर्पित करते हुए पूजा संपन्न करें।
– राखी बांधते हुए इस बात का ध्यान रखें कि भाई का मुख पूर्व दिशीा में हो।
– बहनें सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं और फिर कलाई पर राखी बांधें।
– बहनें भाई के दाहिने हाथ पर राखी बांधे।
– इसके बाद बहन-भाई एक दूसरे को मिठाई खिलाएं