March 7, 2026

स्कूल बचाओ संघर्ष मोर्चा ने किया कलेक्टर के बयान का खंडन…किया सवाल:-क्या शिक्षकों का तबादला होगा निरस्त??..

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सामना न्यूज़:-रायगढ़:- 4 फरवरी को कलेक्टर भीम सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि स्कूल बचाओ सँघर्ष मोर्चा की मांग गलत है और उन्होंने इस पर अलग अलग तर्क भी दिए जिसका संघर्ष मोर्चा ने खंडन करते हुए कलेक्टर भीम सिंह से सवाल करते हुए कहा है कि नटवर स्कूल के हिंदी माध्यम के जिन शिक्षकों का प्रदेश सरकार ने तबादला किया है तो क्या यह तबादला निरस्त होगा जैसा कि कलेक्टर ने कहा कि शिक्षकों का ट्रांसफर नही होगा। साथ ही स्कूल दो पालियों में चलने की बात की जा रही है लेकिन जब हिंदी माध्यम में शिक्षक ही नही है तो दो पालियों में चलाना कैसे संभव है? जबकि शिक्षा अधिकारी ने पिछली मुलाकात में स्पष्ट तौर पर कहा है कि एक बिल्डिंग में दो संस्था संचालित नहीं हो सकती।

स्कूल में हो रहा भेदभाव:– संघर्ष मोर्चा के सदस्यों का यह भी कहना है कि नटवर स्कूल में जाकर कोई भी निरीक्षण कर सकता है कि किस तरह से समान शिक्षा के अधिकार का घोर उल्लंघन किया जा रहा है और ये बात वँहा पढ़ रहे छात्र स्वयं कह रहे है कि जिन कमरों व शौचालयों को आत्मानन्द के लिए बनाया गया है उसमें ताले जड़ दिए जाते है ताकि उनका उपयोग हिंदी माध्यम के बच्चे ना कर सके। जिन 903 गरीब बच्चों से छीनकर 400 बच्चो को लाभान्वित किया जा रहा है क्या ये 903 बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है?

योजनाबद्ध तरीके से बंद किया जा रहा है नटवर स्कूल:-मोर्चा समिति का यह भी कहना है कि नटवर स्कूल सभी स्कूलों का समन्वयक केंद्र था जिसे प्रशासन के आदेश से चक्रधर स्कूल में स्थान्तरित कर दिया और उसी आदेश में यह वर्णित है कि यंहा आत्मानंद संचालित हो रहा है और नटवर स्कूल संचालन बंद हो रहा है इस वजह से समन्वयक केंद्र को दूसरे स्कूल में स्थानातरित किया जा रहा है।जिससे यह स्पष्ट है कि नटवर स्कूल को योजनाबद्ध तरीके से बन्द किया जा रहा है।

मोर्चे की मांग गलत कैसे:- यदि मोर्चा की मांग गलत है तो आत्मानन्द इंग्लिश माध्यम को म्यूनिसिपल स्कूल के जीर्णोद्धार के बाद लेकर जाने की बात क्यों कही जा रही है?जब भी आत्मानन्द और नटवर स्कूल के सम्बंध में हमे आश्वासन मिला सिर्फ मौखिक या प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से ही दिया गया लिखित आदेश देकर हमे विश्वास नहीं दिलाया गया।हम गुणवत्ता युक्त शिक्षा के विरोधी नही है किंतु इसकी आड़ में स्थानीय विभूतियों की पहचान और संस्कृति को मिटाने का जो प्रयास किया जा रहा है उसका हम विरोध करते रहेंगे।