रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ ने जिंदल कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप…कहा-28 अप्रैल तक निर्बाध रूप से बिजली नहीं मिली तो..हम जिंदल प्लांट के मुख्य गेट के सामने आर्थिक नाकेबंदी कर- देंगे धरना
सामना न्यूज़:-रायगढ़:-
पूंजीपथरा स्थित ओपी जिंदल पार्क में उद्योगपतियों और जिंदल प्रबंधन के बीच विवाद की खाई और बढ़ती जा रही है। इन उद्योगपतियों का समूह रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ ने सोमवार शाम प्रेसवार्ता कर जिंदल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने हमें सस्ती बिजली देने का वायदा किया था जिसके कारण 2003 में स्थापित ओपी जिंदल औद्योगिक पार्क में जिले के व्यापारियों ने अपने-अपने उद्योग स्थापित किए। लेकिन वह हर बार बिजली की दरें बढ़ाकर हमारे लिए मुसीबत खड़ा कर देता है। बिजली की दर करने का अधिकार नियामक बोर्ड का है लेकिन जिंदल प्रबंधन ने मनमानी करते हुए दर को बढ़ा दिया है। वह हमें बीते 45 दिनों से बिजली की सप्लाई 10 फीसदी ही दे रहा है जिससे 42 उद्योंगों में काम ठप पड़ा है। 72 घंटे बाद एक प्लांट को 8 घंटे लिए बिजली मिलती है फिर उसे अगले 72 घंटे बाद बिजली मिल रही है। ऐसे में कई मशीनें खराब हो गई हैं और उत्पादन ठप है। जिससे यहां कार्य करने वाले करीब 10,000 लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। हम हर महीने करीब 100 करोड़ का बिजली बिल जिंदल को, 200 करोड़ की जीएसटी सरकार को देते हैं इसके बाद हमारे साथ यह बर्ताव किया जा रहा है।
रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ के अध्यक्ष पवन बंसल ने कहा कि जब हमारा प्लांट बंद है तो हम भी जिंदल का प्लांट बंद कर देंगे। यदि हमें 28 अप्रैल तक निर्बाध रूप से बिजली नहीं मिली तो हम पतरापाली स्थित जिंदल प्लांट के मुख्य गेट के सामने आर्थिक नाकेबंदी कर देंगे और धरना देंगे।
संघ के संजय अग्रवाल (एनआर) ने कहा कि यदि जिंदल समूह हमें बिजली देने में असक्षम है तो वह औद्योगिक पार्क का लाइसेंस सरेंडर कर दे और सरकार हमें बिजली अन्यत्र तरीके से दिलाने का प्रबंध करे। हम उद्योगपतियों ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस के फॉर्मूले पर अपना उद्योग स्थापित किया था लेकिन जब हमें बिजली ही नहीं मिल रही, हमारे उद्योगों पर तालाबंदी की नौबत है। 8 से 10 उद्योगों ने अपने उद्योग को दूसरी पार्टी को बेच दिया। 50 प्रतिशत उद्योग एनपीए (अलाभकारी आस्तियां) की कगार पर हैं।

