पद से बड़ा संगठन का सम्मान—बरखा सिंह..हमारी मांग कांग्रेस हित में थी..सलीम नियारिया..क्या मुद्दा सुलझ गया?..
सामना न्यूज़:-रायगढ़:-बीते माह 10 जनवरी को नगर निगम में अतिक्रमण हटाने के नाम पर कांग्रेस नेत्रियों बरखा सिंह व संजना शर्मा के मध्य नगर निगम में सभापति के कक्ष में हुए विवाद का मामला जांच कमेटी,आलाकमान के फ़ैसले और अंततः कल मंगलवार 16 पार्षदों के इस्तीफ़े पर जाकर सवालिया निशान छोड़ गया।सवाल ये कि:-इस सामूहिक निर्णय पर कांग्रेस पार्टी के आलाकमान का फैसला… किस दिशा में रुख़ करेगा।
इधर इन सवालों और सामूहिक इस्तीफ़े के मध्य अनेक अटकलें और भविष्यवाणी अलग अलग चर्चाएं बनकर खबरों के माध्यम से निकल कर सामने आने लगी कहीं इस सारे मुद्दे को शहर सरकार के ख़िलाफ़ रणनीति तो कहीं संगठन स्तर पर सुनवाई नहीं होने की नाराज़गी और दवाब बनाने की कोशिश के नज़रिए के तौर पर समझा जाने लगा
लेकिन इसी बीच बीती रात ही बरखा सिंह के अपने जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की ब्रेकिंग न्यूज़ मीडिया पर आ चुकी थीअब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि बरखा सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद इस विवाद में पूर्णविराम लगेगा? या बरखा सिंह के पार्टी से निष्कासन की जंग जारी रहेगी
क्योंकि इस मसले पर संजना शर्मा सहित उनके समर्थन में खड़े वरिष्ठ पार्षदों ने भी बरखा सिंह के ना केवल पद से बर्खास्तगी बल्कि पार्टी से निष्कासन की मांग की थी…
बहरहाल बरखा सिंह के पार्टी में यथावत बने रहने या निष्कासन पर आलाकमान द्वारा कोई निर्णय फ़िलहाल नहीं लिया गया है इस सारे सियासी उल्टफेर पर कांग्रेस नेत्री बरखा सिंह का कहना है कि:—“”उन्होंने पार्टी के सम्मान व छवि को देखते हुए एक दिन पूर्व ही 21 जनवरी को अपना इस्तीफा राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम को प्रेषित कर दिया था। मैंने अपने पद का त्याग भले ही कर दिया है लेकिन पार्टी के लिए जो मेरा दायित्व है वह अब भी बरक़रार है आगे भी आलाकमान का जो भी फैसला होगा मैं उसके अनुसार ही कार्य करूंगी।“”
वरिष्ठ पार्षद सलीम नियारिया :-अंततः 42 दिनों के बाद संगठन ने इस मुद्दे पर निर्णय लिया और हम 16 पार्षदों के इस्तीफ़े के बदले हमें भी एक इस्तीफ़ा मिला। बरखा से पार्टी से निष्कासन की मांग हमने की थी लेकिन इस पर संगठन क्या निर्णय लेगा यह उनके ऊपर है।अपने संगठन के हित में हमें जो उचित लगा हमनें मांग की उसे मानना या न मानना आलाकमान पर निर्भर है।अब संगठन के फ़ैसले पर भविष्य में इसका सकारात्मक या नकारात्मक जो भी परिणाम निकल कर सामने आएगा..इसकी जवाबदेही भी संगठन की ही होगी।
बहरहाल 42 दिन पूर्व सुलगे इस विवाद पर पूर्णविराम न सही पर अल्पविराम ज़रूर लग चुका है।कहीं न कहीं इन सारी परिस्थियों में कांग्रेस के दो गुट सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं और इस गुटबाजी का खामियाज़ा या लाभ किसे मिलेगा ..यह भविष्य के गर्भ में ही है।

